विशाल आकाशीय चक्र
1975 – 1989
1975 में ज़ाँ-मार्क फ़िलिप द्वारा परिकल्पित पहली अंतरिक्ष परियोजना, आकाशीय चक्र, में कुछ विरल, चुने हुए और संक्षिप्त अवसरों पर पृथ्वी के चारों ओर 40 कृत्रिम तारों का एक मुकुट प्रज्वलित करने की योजना थी। इन तारों का कांतिमान उस कांतिमान के बराबर या उससे अधिक होना था जो शुक्र का अपनी अधिकतम चमक के समय होता है। उनका प्रकाश 40 समदूरस्थ भूस्थिर उपग्रहों से, धरती से दूर-नियंत्रित की जा सकने वाली एक युक्ति के द्वारा उत्सर्जित किया जाता।
कृत्रिम तारों का यह मुकुट मुख्यतः रात में, पृथ्वी के हर कोने से, समूची मानवता को दिखाई देता। प्रतीकात्मक और राजनीतिक घटनाओं के अवसर पर यह हर बार कुछ क्षणों के लिए जगमगा उठता।
विशाल आकाशीय चक्र, कलाकार की परिकल्पना, निर्माण: ज़ाँ-मार्क फ़िलिप, 1986।
विशाल आकाशीय चक्र, प्रस्तुति-पट्ट, निर्माण: ज़ाँ-मार्क फ़िलिप, 1986।
विशाल आकाशीय चक्र, Galerie Alain Oudin में “Space Art / Art Espace” प्रदर्शनी के दौरान प्रस्तुति, 1985। छायाचित्र: ज़ाँ-मार्क फ़िलिप, 1985।
विशाल आकाशीय चक्र, स्लाइडों पर दृश्य-संयोजन और कलाकार की परिकल्पनाएँ, निर्माण: ज़ाँ-मार्क फ़िलिप।
वीनस +
लगभग 1980 में परिकल्पित और परियोजना के रूप में ही रह गई वीनस + का उद्देश्य आकाश में एक कृत्रिम तारा प्रकट करना था: साँझ ढलते ही सबसे पहले दिखने वाला और भोर में सबसे अंत में ओझल होने वाला। ज़ाँ-मार्क फ़िलिप इसे आकाशीय चक्र और EsArt अवधारणा के साथ उन कृत्रिम प्रकाशीय परिघटनाओं के सिद्धांतों में गिनाते थे, जिनका वर्णन उन्होंने 1975 और 1980 के बीच किया था: प्रकाश के परावर्तन, लेज़र किरणों या इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन से उत्पन्न ये परिघटनाएँ पूरे ग्रह से दिखाई देनी थीं।
विश्व अंतरिक्ष कला समिति (यूनेस्को, 1986)
1980 से ज़ाँ-मार्क फ़िलिप पंद्रह से अधिक संगोष्ठियों में — वेनिस, तोक्यो या एथेंस में — आकाशीय चक्र प्रस्तुत करते हैं। हर जगह एक ही आपत्ति लौट आती है: किस अधिकार से कोई कृति सबके आकाश में स्वयं को अंकित करे? 1983 में तोक्यो में एक जापानी मंत्री उन्हें उत्तर देते हैं कि “उनका आकाश उनका आकाश है”। तब वे इस परियोजना को अकेले आगे बढ़ाने का विचार छोड़ने और पहले किसी भी अंतरिक्ष कला की नैतिक शर्तों पर चिंतन करने का निर्णय लेते हैं।
3 नवंबर 1986 को, यूनेस्को की चालीसवीं वर्षगाँठ के अवसर पर, वे विज्ञान, कला और साहित्य की यूरोपीय अकादमी के तत्वावधान में पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक विशेषज्ञ आयोग बुलाते हैं। उनका कार्य-पत्र प्रस्ताव रखता है कि अंतरिक्ष कला की पहली कृति एक नैतिकता समिति को सौंपी जाए: विश्वव्यापी विचार-आमंत्रण, मानवता से परामर्श, गिरजाघरों की तरह अनाम कृति, सामूहिक वित्त-पोषण। आयोग एक “विश्व अंतरिक्ष कला समिति” के गठन को वांछनीय मानता है और एक “अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए विश्व नैतिकता समिति” के गठन की संस्तुति करता है।
1986 का कार्य-पत्र पढ़ें, और साथ ही Phréatique (1989) तथा अंतरिक्ष कला (1994) लेख भी।
3 नवंबर 1986 को यूनेस्को मुख्यालय में एकत्र विशेषज्ञों को सौंपा गया कार्य-पत्र, 7 पृष्ठ।
सुनें
रिकॉर्डिंग © Radio France / INA और Radio suisse romande, दस्तावेज़ी प्रयोजन से उपलब्ध।
लेख
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप द्वारा
- आकाशीय चक्र — L'Hippocampe, अंक 2, अप्रैल 1984, पृ. 55-58।
- कलात्मक आविष्कार और उसका कायांतरण — Modernes et après : “Les Immatériaux” में, पेरिस, Autrement, 1985, पृ. 173-182।
- विश्व अंतरिक्ष कला समिति: कार्य-पत्र — 3 नवंबर 1986 को पेरिस में यूनेस्को मुख्यालय में एकत्र हुए विशेषज्ञ आयोग को सौंपा गया टंकित कार्य-पत्र (7 पृष्ठ)।
- जब कला, अंतरिक्ष और स्वप्न मिलते हैं… और जब चिंतन अनिवार्य हो जाता है — Phréatique. Langage et création, अंक 49, ग्रीष्म 1989, पृ. 107-116।
- अनंत सूक्ष्म से अनंत विराट तक: पदार्थ / स्मृति / अंतःक्रियाशीलता / ब्रह्मांड — Les Transinteractifs में, 4 और 5 नवंबर 1988 की संगोष्ठी की कार्यवाही (कनाडाई सांस्कृतिक केंद्र, पेरिस), फ़्रैंक पॉपर के निर्देशन में “Déchiffrages” शृंखला, पृ. 82-87।
- अंतरिक्ष कला — रेमों दोदेल और निकोल लमेर दागाजो (सं.), La science et la métamorphose des arts में, पेरिस, Presses universitaires de France, 1994, पृ. 141-160।
- सांस्कृतिक मैट्रिक्स और कलात्मक सृजन: अपनी कला के शास्त्रीय अभ्यास से पारविषयकता तक — मिशेल कज़नाव और बसाराब निकोलेस्कु (प्रस्तुति), L'Homme, la science et la nature : regards transdisciplinaires में, एक्स-आँ-प्रोवाँस, Le Mail, “Science et conscience” शृंखला, 1994, पृ. 232-264।
ज़ाँ-मार्क फ़िलिप पर
- श्वेत कृति (Galerie Eolia का कैटलॉग) — Jean-Marc Philippe. Œuvres récentes 1976-1984 : l'Œuvre blanche, पेरिस, Galerie Eolia, “Les Cahiers Eolia” अंक 2, 1985।
- वीडियो में कलाकार का पोर्ट्रेट — ज़ील तोर्दज्मान, “वीडियो में कलाकार का पोर्ट्रेट”, Revue d'esthétique, अंक 10 (“Vidéo-Vidéo”), तूलूज़, Privat, 1986, पृ. 155-158।
संदर्भ और लिंक
पुस्तकें, कैटलॉग और पत्रिकाएँ
- आलाँ ऊदाँ, “L'Art spatial”, Autrement, अंक 77 (“L'Espace super star”), फ़रवरी 1986, पृ. 196-197।
- पियरे प्वा, Ils ont rêvé l'espace. De Plutarque au Space Art, पेरिस, Hatier, “Regard sur l'espace” शृंखला, 1992, अध्याय “Les maîtres du Space Art”, पृ. 153-163।
- अनिक ब्यूरो, “L'art de l'ère spatiale”, Art Press, अंक 269, जून 2001।
- आद्रियाँ गोएत्ज़, “Les yeux dans les étoiles”, Le Journal des Arts, अंक 551, 1 अक्टूबर 2003।
- सोफ़ी ब्रुएर और फ़्रांस्वा गोवाँ, “Terre || Lumière”, Figures de l'Art, अंक 17, 2009, पृ. 226-227 (DOI)।
- रॉजर एफ़. मलीना, “Space Art As Public Art: The Artist As Space Researcher”, Delicate Balance: Technics, Culture and Consequences, IEEE, अक्टूबर 1989, पृ. 260-266 (DOI)।
- रॉजर एफ़. मलीना, “In Defense of Space Art: The Role of the Artist in Space Exploration”, International Astronomical Union Colloquium, खंड 112, जनवरी 1991, पृ. 145-152।
रेडियो
- ज़ाक प्रादेल, Adrénaline, France Inter, 16 जुलाई 1986।
ऑनलाइन संसाधन
- “Space art”, पोम्पीदू केंद्र।
- Festival @rt Outsiders 2003, “Space Art”, Maison européenne de la photographie, पेरिस।































