Jean-Marc Philippe
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आकार-स्मृति मिश्रधातुएँ

1930 के दशक में ही वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगा लिया था कि कुछ धात्विक मिश्रधातुएँ आकारों को स्मृति में सँजो सकती हैं और केवल तापमान में परिवर्तन के द्वारा उन्हें फिर से प्रकट कर सकती हैं। 1960 के दशक से विश्व-भर में परमाणु भौतिकी की प्रमुख प्रयोगशालाओं ने इन गुणों का अध्ययन किया है। 1980 के दशक से ही अनेक औद्योगिक अनुप्रयोग सामने आने लगे, विशेषकर विमानन और चिकित्सा के क्षेत्रों में।

ज़ाँ-मार्क फ़िलिप पहले कलाकार थे जिन्होंने इन मिश्रधातुओं का उपयोग कलात्मक और स्मारकीय उद्देश्यों के लिए करना चाहा। उस समय इस प्रौद्योगिकी में विश्व-अग्रणी Raychem Corporation समूह के सहयोग से वे 1986 और 1990 के बीच अपनी कृतियों के निर्माण के लिए आवश्यक शोध कर सके। इंजीनियर फ़िलिप पोंसे ने इस कार्य को कई वर्षों तक पूर्णकालिक रूप से समर्पित किया, और स्वयं उन्हें इन निकल/टाइटेनियम मिश्रधातुओं के विश्व-विख्यात विशेषज्ञ टॉम ड्यूरिग का साथ मिला। इसके अतिरिक्त कैलिफ़ोर्निया के मेनलो पार्क स्थित Raychem समूह की “Metal Division” से जुड़े अनेक तकनीशियनों की सहायता भी प्राप्त हुई।

प्रेस में

“Matériaux actifs : l'explosion de l'intelligence” — Sciences et Avenir, अंक 571, सितंबर 1994, पृ. 72

“Matériaux actifs : l'explosion de l'intelligence”, Sciences et Avenir, अंक 571, सितंबर 1994, पृ. 72, पृष्ठ 1“Matériaux actifs : l'explosion de l'intelligence”, Sciences et Avenir, अंक 571, सितंबर 1994, पृ. 72, पृष्ठ 2

सुनें

  • 1 जून 1988 — La Science au naturel, France Inter
    आकार-स्मृति मिश्रधातुओं से बनी मूर्तियाँ

  • 5 जून 1988 — L'Oreille en coin, France Inter
    आकार-स्मृति मिश्रधातुओं से बनी मूर्तियाँ

  • 12 मार्च 1991 — Magazine, Espace 2 – Sciences, Radio suisse romande
    आकार-स्मृति मिश्रधातुएँ

रिकॉर्डिंग © Radio France / INA और Radio suisse romande, दस्तावेज़ी प्रयोजन से उपलब्ध।

लेख

ज़ाँ-मार्क फ़िलिप द्वारा

ज़ाँ-मार्क फ़िलिप पर

संदर्भ और लिंक

पुस्तकें, कैटलॉग और पत्रिकाएँ

  • फ़िलिप पोंसे, “Art and Shape-Memory Alloys: Jean-Marc Philippe”, Leonardo, खंड 22, अंक 1, MIT Press, जनवरी 1989, पृ. 117-120।
  • क्रिस्तियान गालूस, “Le mouvement qui déplace les lignes”, Le Monde, 25 मई 1988, पृ. 23।
  • इज़ाबेल लेक्यूये-द्यूजार्दाँ और दिमित्रा मार्कोवित्सी, “Les nouveaux matériaux – Sculpture à mémoire”, Théma, खंड 5 “Sciences et techniques”, पेरिस, Larousse, 1994, पृ. 349।
  • लियोनेल सालेम, La Science dans l'art, पेरिस, Odile Jacob, 2000, अध्याय “La science ‘mise en art’”, पृ. 25-48।
  • फ़्रैंक पॉपर, L'art à l'âge électronique, पेरिस, Hazan, 1993, पृ. 130-131।
  • ज़ाकलीन ब्रेनो, “Totem du Futur”, L'Europe des créateurs : Utopies 89 में, पेरिस, Association des entreprises pour le Bicentenaire, 1989, पृ. 16-21 (प्रविष्टि)।

प्रेस में KEO

  • वेरोनिक मोरूस, “Retour vers le futur”, Le Monde, 16 अगस्त 1998 (ऑनलाइन)।

ऑनलाइन संसाधन